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प्रधानमंत्री उद्योग संबंधित बायोटेक्नोलॉजी अनुसंधान योजना

प्रधानमंत्री भारतीय जीवाणु उत्पादन योजना (pm-birac) ने भारतीय उद्योग और बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए "उद्योग संबंधित बायोटेक्नोलॉजी अनुसंधान योजना" की शुरुआत की है। य...


Bitu Mandal

5/7/20242 min read

उद्योग संबंधित बायोटेक्नोलॉजी अनुसंधान योजना: एक अवसर

प्रधानमंत्री भारतीय जीवाणु उत्पादन योजना (PM-BIRAC) ने भारतीय उद्योग और बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए "उद्योग संबंधित बायोटेक्नोलॉजी अनुसंधान योजना" की शुरुआत की है। यह योजना उद्योग से जुड़े बायोटेक्नोलॉजी अनुसंधान को प्रोत्साहित करने का उद्देश्य रखती है।

योजना का उद्देश्य

उद्योग से जुड़ा बायोटेक्नोलॉजी अनुसंधान को बढ़ावा देना:

यह योजना उद्योग से जुड़े बायोटेक्नोलॉजी अनुसंधान को बढ़ावा देने का माध्यम है। यह नई और नवाचारी तकनीकों के विकास को प्रोत्साहित करती है जो उद्योगीकरण, उत्पादन और बाजार में लागू किए जा सकते हैं।

योजना के लाभ

उद्योग और शोधकर्ताओं के लिए आर्थिक सहायता:

यह योजना उद्योग और शोधकर्ताओं को आर्थिक सहायता प्रदान करती है ताकि वे नवाचारिक अनुसंधान कार्यों को सम्पन्न कर सकें और नई तकनीकों को विकसित कर सकें।

अनुसंधान क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करना:

इस योजना के तहत, अनुसंधान क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित किया जाता है जो बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की गति को तेजी से बढ़ाता है।

योजना की कार्यप्रणाली

आवेदन प्रक्रिया:

योजना के लिए आवेदन करने के लिए आवश्यक दस्तावेज़ों को संलग्न करना होगा।

अनुसंधान परियोजनाओं का चयन:

उद्योग से जुड़े अनुसंधान परियोजनाओं का चयन शोधकर्ताओं की देखरेख में किया जाता है जो नवाचारिक और विशेषज्ञता के क्षेत्र में काम कर रहे हों।

सफलता की कहानियाँ

इस योजना के माध्यम से कई अनुसंधान कार्यों ने वैज्ञानिक समुदाय में उत्कृष्टता की ऊँचाइयों को छूने का साबित किया है।


"उद्योग संबंधित बायोटेक्नोलॉजी अनुसंधान योजना" एक अद्वितीय योजना है जो उद्योग और बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र में नवाचार और विकास को प्रोत्साहित करती है। इसके माध्यम से, उद्योग को नई तकनीकों और विज्ञान की खोज में मदद मिलती है और विशेषज्ञता का विकास होता है।

अद्यतन और निरंतरता

योजना के लाभ और प्रक्रिया में किए जाने वाले किसी भी अद्यतन के लिए आप प्रधानमंत्री भारतीय जीवाणु उत्पादन योजना (PM-BIRAC) की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  1. कौन-कौन सी अनुसंधान परियोजनाओं को इस योजना के तहत चुना जाता है?

  2. क्या आवेदन प्रक्रिया कितनी अद्यतित है?

  3. क्या इस योजना के लिए कोई विशेष पात्रता मानदंड हैं?

  4. कैसे योजना के लाभार्थी बन सकते हैं?

  5. योजना का अधिकारिक वेबसाइट क्या है?


  1. Scientists and Technologists of R&D Centers, academic Institutions, and Organizations engaged in biotechnological research focusing on marine, agriculture, health, and environment will receive a grant of ₹40 lakhs for three years, excluding overhead costs and industry share (25%).

  2. Furthermore, the hosting organization will qualify for an additional 10% overhead on the total expenses, with a maximum limit of ₹2 lakh.

Note: In order to participate in the program, the industrial collaborator must be willing to contribute an additional 25% of funds. They will need to submit a clear statement, endorsed by the Head of the organization, which clearly outlines the level of financial support and provides a breakdown of the budget.


  1. The applicants should be the Scientists and Technologists of R&D Centers/Academic Institutions/Organizations actively involved in biotechnological research with emphasis on areas relating to marine, agriculture, health, and environment.

  2. The proposals need to be submitted in active collaboration with an industry in which the industrial partner is willing to share 25% of the Kerala Biotechnology Commission allocated funds additionally.

Application Process


Step 01: Applications are invited through advertisement and the project proposal should be submitted online.

Step 02: Applications must have the endorsement from the Head of Institution (HoI) and it should be forwarded by the HoI.

Step 03: After receiving the project proposal, it will be acknowledged with a reference number and other instructions, if any.

Step 04: If the project proposal adheres to the format and guidelines set by KSCSTE, it will be forwarded to five referees for evaluation. Once the referees provide their comments, the project proposals will be presented to the expert committee for the final decision. If at least three out of the five referees have a positive response, the Principal Investigator (PI) may be invited for a presentation. Regardless of the outcome, the decision will be communicated to the PI.

Step 05: The content and objectives of the proposed project are evaluated by the expert committee, which then suggests the appropriate level of assistance for each project. The final decision on these proposals rests with KSCSTE, taking into account the recommendations of the expert committee.

Contact Details:

The Scientist-in-charge

Kerala Bio-Technology Commission

Kerala State Council for Science, Technology and Environment (KSCSTE),

Sasthra Bhavan, Pattom, Thiruvananthapuram – 695 004

Telephone: (0471) 2548254, 2548406


Documents Required

1.Identity proof of applicant

2.Passport size photographs

3.Educational certificates

4.Technical report/proposal

5.Disability certificate (If applicable)

6.Endorsement from the

Collaborating Industry

7.Endorsement from the

Head of Institution

8.Any other document, if required